Mathematics is a art of judging someone's sharpness - Dhruv sir
Ajeet Singh Dhruv
WORLD OF MY WORDS-AJEET SINGH DHRUV, LOVE POEMS,LOVE QUOTES,HINDI SHAYARIS,SAD POEMS
Sunday, 15 February 2015
Monday, 13 October 2014
Sunday, 5 October 2014
Jo beet gayi so baat gayi
जो बीत गई सो बात गई!
जीवन में एक सितारा था,
माना, वह बेहद प्यारा था,
वह डूब गया तो डूब गया;
अंबर के आनन को देखो,
कितने इसके तारे टूटे,
कितने इसके प्यारे छूटे,
जो छूट गए फिर कहाँ मिले;
पर बोलो टूटे तारों पर
कब अंबर शोक मनाता है!
जो बीत गई सो बात गई!
जीवन में वह था एक कुसुम,
थे उस पर नित्य निछावर तुम,
वह सूख गया तो सूख गया;
मधुवन की छाती को देखो,
सूखीं कितनी इसकी कलियाँ,
मुरझाईं कितनी वल्लरियाँ
जो मुरझाईं फिर कहाँ खिलीं;
पर बोलो सूखे फूलों पर
कब मधुवन शोर मचाता है;
जो बीत गई सो बात गई!
जीवन में मधु का प्याला था,
तुमने तन-मन दे डाला था,
वह टूट गया तो टूट गया;
मदिरालय का आँगन देखो,
कितने प्याले हिल जाते हैं,
गिर मिट्टी में मिल जाते हैं,
जो गिरते हैं कब उठते हैं;
पर बोलो टूटे प्यालों पर
कब मदिरालय पछताता है!
जो बीत गई सो बात गई!
मृदु मिट्टी के हैं बने हुए,
मधुघट फूटा ही करते हैं,
लघु जीवन लेकर आए हैं,
प्याले टूटा ही करते हैं,
फिर भी मदिरालय के अंदर
मधु के घट हैं, मधुप्याले हैं,
जो मादकता के मारे हैं,
वे मधु लूटा ही करते हैं;
वह कच्चा पीने वाला है
जिसकी ममता घट-प्यालों पर,
जो सच्चे मधु से जला हुआ
कब रोता है, चिल्लाता है!
जो बीत गई सो बात गई!
Harivansh Rai Bachhan
Ajeet singh Dhruv
Ramdhari singh Dinker
क्षमा, दया, तप, त्याग, मनोबल
सबका लिया सहारा
पर नर व्याघ्र सुयोधन तुमसे
कहो, कहाँ कब हारा ?
क्षमाशील हो रिपु-समक्ष
तुम हुये विनत जितना ही
दुष्ट कौरवों ने तुमको
कायर समझा उतना ही।
अत्याचार सहन करने का
कुफल यही होता है
पौरुष का आतंक मनुज
कोमल होकर खोता है।
क्षमा शोभती उस भुजंग को
जिसके पास गरल हो
उसको क्या जो दंतहीन
विषरहित, विनीत, सरल हो।
तीन दिवस तक पंथ मांगते
रघुपति सिन्धु किनारे,
बैठे पढ़ते रहे छन्द
अनुनय के प्यारे-प्यारे।
उत्तर में जब एक नाद भी
उठा नहीं सागर से.
उठी अधीर धधक पौरुष की
आग राम के शर से।
सिन्धु देह धर त्राहि-त्राहि
करता आ गिरा शरण में
चरण पूज दासता ग्रहण की
बँधा मूढ़ बन्धन में।
सच पूछो, तो शर में ही
बसती है दीप्ति विनय की
सन्धि-वचन सम्पूज्य उसी का
जिसमें शक्ति विजय की।
सहनशीलता, क्षमा, दया को
तभी पूजता जग है
बल का दर्प चमकता उसके
पीछे जब जगमग है।
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Sunday, 1 June 2014
Aaj jo tu khil - khilaati hai
Toh yaad aya akhir door bhi toh mai hi gaya tha teri khushi ke liye..
Saturday, 31 May 2014
Haa maine mela dekha hai
Chup chaap khade ek kone se,
Jhulo ko chalte dekha hai, 😞
Haa maine mela dekha hai.
Parde ke piche se chipkar,
Joker ko haste dekha hai,
Haa maine mela dekha hai.
Chanchal mann me liye lalsaa..
Maine soch liya jb,
Wo barf ka gola khaana hai.
Bheegi aankho se maa ne puch liya tb, kya mere laal ne mela dekh liya? :(
Nanhe batuye se maa ko,
Chhand paise ginte dekha hai,
Haa maine mela dekha hai.
Maa inn jhulo se darr sa lagta hai,
Ye joker toh yun hi hasta hai, bhala ye barf bhi koi khaata hai.
Chal maa, haa maine mela dekh liya..😥😞
Haa maine mela dekha hai.
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Kabhi puchha hai khudse ??
Jiske tu sbse kareeb rehta hai 'Dhruv'
Wo jo,
Jise tu sbse ajeeb lagta hai
Wo jo,
Jise tu ek fareb lagta hai wo jo,
Jise tu apna naseeb manta hai Kabhi puchha hai khudse ??
Na jaane kyu ?
Wo hi tujhe sbse ajeej lgta hai 'Dhruv'..:-(